“भारत को जानो, भारत को मानो, भारत के बनो और भारत के बनाओ” जैसे विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत कार्यवाह डॉ. शंकरलाल माली ने आर.एन.टी. कॉलेज, कपासन में आयोजित युवा संगोष्ठी के मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए।
डॉ. माली ने भारत, धर्म और हिंदू शब्दों के अर्थ बताते हुए युवाओं में जीवन-मूल्यों की स्थापना पर बल दिया। उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म केवल कोई धर्म न होकर जीवन जीने की एक पद्धति है, जो भारत की अन्य देशों से विशिष्ट पहचान कराती है। दूसरों के लिए जीने और उनके कल्याण की भावना भारतीय जीवन-पद्धति में समाहित है।


