आर.एन.टी. कॉलेज में मनाया गया सोमनाथ स्वाभिमान उत्सव

11 मई 2026। “सोमनाथ मंदिर भारत का स्वाभिमान है, जो शक्ति, भक्ति एवं सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।” यह विचार साहित्यकार एवं पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी, अकादमिक निदेशक शिवनारायण शर्मा ने रविन्द्रनाथ टैगोर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कपासन में आयोजित “सोमनाथ स्वाभिमान उत्सव” संगोष्ठी में मुख्य अतिथि एवं वक्ता के रूप में व्यक्त किए।

अपने उद्बोधन में श्री शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात 11 मई 1951 को सोमनाथ मंदिर का पुनः उद्घाटन हुआ था। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक घटना की 75वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। उस समय भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने मंदिर को राष्ट्र को समर्पित किया था। उन्होंने सोमनाथ मंदिर को भारत की आध्यात्मिक शक्ति, सांस्कृतिक गौरव तथा राष्ट्रीय पुनर्जागरण का प्रतीक बताया।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं हिंदी साहित्यकार डॉ. रामसिंह चूंडावत ने सोमनाथ मंदिर के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पौराणिक मान्यता के अनुसार चंद्रदेव (सोम) ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप इस ज्योतिर्लिंग का नाम “सोमनाथ” पड़ा। उन्होंने मंदिर के गौरवशाली इतिहास, उसके अनेक बार हुए पुनर्निर्माण तथा भारतीय संस्कृति में उसके महत्वपूर्ण स्थान का विस्तार से वर्णन किया।