आर.एन.टी. पीजी कॉलेज में स्टूडेंट ओरिएंटेशन कम इंडक्शन प्रोग्राम का आयोजन

11 सितम्बर, 2025 — “संघ-व्यवस्था ही व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक शीघ्रता से पहुंचाती है।” ऐसे विचार आर.एन.टी. पीजी कॉलेज, कपासन में आयोजित स्टूडेंट ओरिएंटेशन कम इंडक्शन प्रोग्राम में मुख्य वक्ता करियर डिप्लोमैट भारत सरकार एवं पॉलिसी ऑफिसर, यूनाइटेड नेशन्स सिद्धार्थ राजहंस ने व्यक्त किए।

राजहंस ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इच्छाशक्ति का विकास संघ-व्यवस्था ही सिखाती है। मानव की सफलता व्यक्ति-परख होती है। अतः व्यक्ति की इच्छाओं की पूर्ति, संतुष्टि, परिवार–दोस्तों के साथ बिताया समय या मनचाहा काम करने की आज़ादी—ये सभी कारक व्यक्तित्व के आंतरिक विकास को प्रभावित करते हैं और यही व्यक्ति को लक्ष्य प्राप्ति की ओर अग्रसर करते हैं। प्रधानमंत्री के “विकसित भारत 2047” के सपने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही 2047 के विकसित भारत का युवा होगा, जो देश की आर्थिक और राजनैतिक स्थिति को दिशा और दशा प्रदान करेगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय प्रबंध निदेशक डाॅ. वसीम खान ने सभी नवागंतुक विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि युवा राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। यदि उनका पालन-पोषण एवं विकास नज़ाकत से किया जाए, तो वे भ्रष्‍टाचार के खिलाफ बिगुल बजाकर किसी राष्ट्र को प्रगति की राह पर आगे ले जा सकते हैं। डॉ. खान ने इस कथन को अनेक उदाहरणों से समझाते हुए कहा कि जब व्यक्ति अपने मन से आगे बढ़ता है, तो लक्ष्य आसान हो जाता है।

संस्था सचिव नीमा खान ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि अनुशासन और विनम्रता को जीवन का आधार बना लीजिए, सफलता अपने आप आपके चरण चूमेगी। अकादमिक निदेशक शिवनारायण शर्मा ने विद्यार्थियों को अपने जीवन–वृत्तांत सुनाते हुए कहा कि डिग्रियाँ नौकरी की मोहताज नहीं होतीं, प्रतिभा स्वयं सफलता के मार्ग प्रशस्त कर देती है। इस अवसर पर उन्होंने महाविद्यालय का संपूर्ण परिचय देते हुए संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।

स्टूडेंट ओरिएंटेशन कम इंडक्शन प्रोग्राम के प्रथम सत्र में सभी विद्यार्थियों ने अपना परिचय, हॉबी और लक्ष्य साझा किया। तत्पश्चात एलुमनाई विद्यार्थियों का स्वागत एवं सम्मान किया गया। महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. एस.एन.ए. जाफरी ने महाविद्यालय की आधारभूत भौतिक एवं मानवीय संरचना से अवगत कराया।